/ Dec 23, 2024
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विश्वकर्मा जयंती आज मनाई जा रही है. इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है. यह दिन देवता भगवान विश्वकर्मा जी का माना जाता है. इस दिन कल कारखानों में मशीनों की पूजा की जाती है.
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा ?
भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मा जी का पुत्र माना जाता है. धार्मिक आचार्यों के मुताबिक, देवताओं के रहने के लिए महलों का निर्माण और डिजाइन भगवान विश्वकर्मा ने किया था. उनके नाम पर यह जयंती इसलिए मनाई जाती है क्योंकि विश्वकर्मा जी सृष्टि के पहले शिल्पकार वास्तुकार और इंजीनियर थे।
विश्वकर्मा जी सृष्टि के पहले शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार जब ब्रह्राजी ने सृष्टि की रचना की तो इसके निर्माण कार्य की जिम्मेदारी भगवान विश्वकर्मा जी को दी। शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ब्रह्राा जी के सातवें पुत्र हैं।
इस साल विश्वकर्मा जयंती आज यानि 17 सितंबर को पड़ रही है। इस दिन विशेष तौर से औजारों की पूजा की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन काल में देवी देवताओं के लिए जितने भी अस्त्र-शस्त्र बनाए जाते थे वह सब विश्वकर्मा जी ही बनाया करते थे। इसलिए उन्हें वास्तुकार का निर्माण देवता कहा जाता था।
धार्मिक मान्याताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा जी ने इंद्रलोक, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका एवं हस्तिनापुर, कलयुग में जगन्नाथपुरी आदि का निर्माण किया था। इसके अलावा शिव जी का त्रिशूल, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज और भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र को भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था।
कैसे करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना?
सबसे पहले भगवान श्री गणेश जी का ध्यान करें. इसके बाद स्वास्तिक पर चावल और फूल अर्पित करें, फिर उस चौकी पर भगवान विष्णु और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें. एक चौरस दीपक जलाकर चौकी पर रखें. भगवान विश्वकर्मा जी के माथे पर तिलक लगाएं और पूजा करें.
विश्वकर्मा जी ने द्वारका शहर का निर्माण किया था जहां भगवान कृष्ण ने शासन किया, पांडवों की माया सभा, और देवताओं के लिए कई शानदार हथियारों के निर्माता थे। उन्हें लुहार कहा जाता है, ऋग्वेद में उल्लेख किया गया है.
भगवान विश्वकर्मा की विशेष प्रतिमाएँ और चित्र फैक्ट्री और कल-कारखाने में विशेष तौर पर स्थापित किए जाते हैं। विश्वकर्मा जयंती के दिन इनकी पूजा की जाती है.
विश्वकर्मा जयंती मुहूर्त (Vishwakarma Jayanti 2024 Shubh Muhurat)
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